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Jhootha Sach
Published
1958
Pages
800
Language
Hindi
ISBN
9789350641231
About this book
An epic two-volume Hindi novel chronicling the impact of Partition on ordinary lives.
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"झूठा सच" विभाजन की मानवीय त्रासदी को गहराई से समझने के इच्छुक पाठकों और हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए एक अनिवार्य पठन है। यह एक गहन और मार्मिक अनुभव प्रदान करती है, लेकिन हल्के या त्वरित पठन की तलाश करने वालों को इससे बचना चाहिए।
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यशपाल का महाकाव्यात्मक उपन्यास "झूठा सच" भारत के विभाजन की मानवीय त्रासदी और आम लोगों के जीवन पर पड़े उसके गहरे प्रभाव को दर्शाता है। यह दो खंडों में प्रकाशित कृति विभाजन की विभीषिका, विस्थापन, सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल और मानवीय संबंधों के टूटने-जुड़ने की मार्मिक गाथा प्रस्तुत करती है। यह उस दौर के समाज का यथार्थवादी चित्रण है, जिसमें आशा, निराशा, संघर्ष और अस्तित्व की लड़ाई को बखूबी दर्शाया गया है।
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